शब्द विचार (Morphology)
सर्वनाम (Pronoun)
Download PDFसंज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं। हिंदी में ग्यारह सर्वनाम और छह भेद हैं।
इस पृष्ठ में
यदि सर्वनाम न होते, तो हमें हर बार पूरा नाम दोहराना पड़ता:
तुलना कीजिए
राम बाज़ार गया। राम ने राम की पुस्तक खरीदी। राम घर लौट आया।
राम बाज़ार गया। उसने अपनी पुस्तक खरीदी। वह घर लौट आया।
दूसरा वाक्य-समूह सहज लगता है, क्योंकि वहाँ राम के स्थान पर सर्वनाम आ गए। सर्वनाम शब्द का अर्थ ही है — सर्व (सब) का नाम, अर्थात् जो सबके नाम की जगह ले सके।
हिंदी के मूल सर्वनाम
हिंदी में मूल सर्वनाम ग्यारह हैं:
उदाहरण
- मैं
- तू
- आप
- यह
- वह
- जो
- सो
- कौन
- क्या
- कोई
- कुछ
इन्हीं ग्यारह से रूप बदलकर मुझे, तुझे, उसने, इनका, किसी आदि सारे रूप बनते हैं।
सर्वनाम के भेद
प्रयोग के आधार पर सर्वनाम के छह भेद हैं।
1. पुरुषवाचक सर्वनाम
जो बोलने वाले, सुनने वाले या किसी अन्य के लिए प्रयुक्त हों। इसके तीन उपभेद हैं:
| पुरुष | किसके लिए | सर्वनाम |
|---|---|---|
| उत्तम पुरुष | बोलने वाला स्वयं | मैं, हम |
| मध्यम पुरुष | जिससे बात हो रही है | तू, तुम, आप |
| अन्य पुरुष | जिसके विषय में बात हो | वह, वे, यह, ये |
वाक्य में
मैं विद्यालय जाता हूँ। — उत्तम पुरुष
तुम क्या पढ़ रहे हो? — मध्यम पुरुष
वह कल आएगा। — अन्य पुरुष
2. निश्चयवाचक सर्वनाम
जो किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करे। इसे संकेतवाचक भी कहते हैं।
उदाहरण
- यह
- वह
- ये
- वे
वाक्य में
यह मेरी पुस्तक है। — पास की वस्तु
वह उनका घर है। — दूर की वस्तु
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
जिससे किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध न हो।
उदाहरण
- कोई
- कुछ
वाक्य में
द्वार पर कोई खड़ा है। — कौन, यह ज्ञात नहीं।
थाली में कुछ रखा है।
4. संबंधवाचक सर्वनाम
जो वाक्य के दो भागों को जोड़े और किसी अन्य सर्वनाम से संबंध बताए। ये प्रायः जोड़े में आते हैं।
उदाहरण
- जो — सो
- जो — वह
- जैसा — वैसा
- जितना — उतना
वाक्य में
जो परिश्रम करेगा, वह सफल होगा।
जैसा करोगे, वैसा भरोगे।
5. प्रश्नवाचक सर्वनाम
जिनका प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए हो।
उदाहरण
- कौन
- क्या
- किसने
- किसका
वाक्य में
कौन आया है?
तुमने क्या कहा?
6. निजवाचक सर्वनाम
जो कर्ता के स्वयं होने का बोध कराए। इसका मुख्य रूप आप है।
वाक्य में
मैं आप ही चला जाऊँगा।
वह अपना काम स्वयं करता है।
“आप” के दो अलग प्रयोग
आप शब्द दो भिन्न भेदों में आता है, और यही सबसे अधिक भ्रम पैदा करता है।
| वाक्य | भेद | क्यों |
|---|---|---|
| आप कहाँ जा रहे हैं? | पुरुषवाचक (मध्यम) | सुनने वाले के लिए, आदर सूचक |
| मैं आप ही कर लूँगा। | निजवाचक | कर्ता के स्वयं होने का बोध |
सर्वनाम के रूप-परिवर्तन
संज्ञा की भाँति सर्वनाम भी विकारी है — कारक के अनुसार इसका रूप बदलता है।
| सर्वनाम | कर्ता | कर्म / संप्रदान | संबंध |
|---|---|---|---|
| मैं | मैंने | मुझे, मुझको | मेरा |
| तू | तूने | तुझे, तुझको | तेरा |
| वह | उसने | उसे, उसको | उसका |
| यह | इसने | इसे, इसको | इसका |
अभ्यास
-
“जो परिश्रम करेगा, वह सफल होगा।” — इसमें कौन-सा सर्वनाम भेद है?
उत्तरसंबंधवाचक सर्वनाम — “जो” और “वह” जोड़े में आकर वाक्य के दो भागों को जोड़ रहे हैं।
-
“मैं आप ही चला जाऊँगा।” — यहाँ “आप” कौन-सा सर्वनाम है?
उत्तरनिजवाचक सर्वनाम, क्योंकि इसके स्थान पर “स्वयं” रखने पर अर्थ नहीं बदलता।
-
हिंदी में मूल सर्वनाम कितने हैं?
उत्तरग्यारह — मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कौन, क्या, कोई, कुछ।
-
“कोई” और “कुछ” के प्रयोग में क्या अंतर है?
उत्तर“कोई” सामान्यतः प्राणियों के लिए और “कुछ” निर्जीव वस्तुओं के लिए प्रयुक्त होता है। दोनों अनिश्चयवाचक हैं।
-
सर्वनाम और संज्ञा में एक व्यावहारिक अंतर बताइए।
उत्तरसंज्ञा के साथ विशेषण लग सकता है (सुंदर लड़की), सर्वनाम के साथ सामान्यतः नहीं (सुंदर वह — अशुद्ध)।