रचना (Composition)
पत्र लेखन (Letter Writing)
Download PDFऔपचारिक और अनौपचारिक — दो प्रकार के पत्र, जिनके अंग, क्रम और भाषा अलग-अलग नियमों से बँधे हैं।
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पत्र वह रचना है जिसमें पाने वाला सामने नहीं होता। इसीलिए उसका प्रारूप इतना निश्चित है — जो बात आमने-सामने स्वर और हाव-भाव से स्पष्ट हो जाती, वह पत्र में क्रम और शब्द-चयन से स्पष्ट करनी पड़ती है।
पत्र दो प्रकार के होते हैं।
| प्रकार | किसे | भाषा |
|---|---|---|
| औपचारिक | अधिकारी, संपादक, प्रधानाचार्य, संस्था | संयत, विषय-केंद्रित |
| अनौपचारिक | माता-पिता, मित्र, संबंधी | सहज, आत्मीय |
औपचारिक पत्र के अंग
क्रम इसी तरह रहता है:
| क्रम | अंग | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | प्रेषक का पता | सेवा में लिखने से पहले अपना पता |
| 2 | दिनांक | 15 सितंबर 2026 |
| 3 | पाने वाले का पद और पता | सेवा में, प्रधानाचार्य महोदय… |
| 4 | विषय | एक पंक्ति में पत्र का प्रयोजन |
| 5 | संबोधन | महोदय / महोदया |
| 6 | विषय-वस्तु | दो या तीन अनुच्छेद |
| 7 | समापन | सधन्यवाद / भवदीय |
| 8 | हस्ताक्षर और विवरण | नाम, कक्षा, अनुक्रमांक |
औपचारिक पत्र का नमूना
नमूना — अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
नई दिल्ली
दिनांक — 15 सितंबर 2026
विषय — तीन दिन के अवकाश हेतु प्रार्थना पत्र
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मुझे तीव्र ज्वर हो जाने के कारण चिकित्सक ने तीन दिन विश्राम करने की सलाह दी है। इस कारण मैं 16 सितंबर से 18 सितंबर तक विद्यालय आने में असमर्थ रहूँगा।
अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे उक्त अवधि का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें। मैं स्वस्थ होते ही विद्यालय उपस्थित हो जाऊँगा और छूटा हुआ कार्य पूर्ण कर लूँगा।
सधन्यवाद
भवदीय
मोहन शर्मा
कक्षा — दसवीं ‘अ’
अनुक्रमांक — 24
अनौपचारिक पत्र के अंग
यहाँ प्रारूप हल्का होता है और विषय नहीं लिखा जाता।
| क्रम | अंग | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | अपना पता और दिनांक | — |
| 2 | संबोधन | पूज्य पिता जी / प्रिय मित्र |
| 3 | अभिवादन | सादर प्रणाम / नमस्ते |
| 4 | विषय-वस्तु | कुशल-क्षेम, मुख्य बात, समाचार |
| 5 | समापन | आपका आज्ञाकारी / तुम्हारा मित्र |
| 6 | नाम | — |
संबोधन और समापन
संबोधन और समापन का मेल ग़लत हो जाना सबसे आम भूल है। यह तालिका उसे रोक देती है।
| किसे | संबोधन | समापन |
|---|---|---|
| अधिकारी, प्रधानाचार्य | महोदय / महोदया | भवदीय / भवदीया |
| संपादक | महोदय | भवदीय |
| माता-पिता, बड़े | पूज्य / आदरणीय | आपका आज्ञाकारी पुत्र |
| भाई-बहन, मित्र | प्रिय | तुम्हारा मित्र / स्नेही |
| छोटों को | प्रिय / चिरंजीव | शुभचिंतक / तुम्हारा भाई |
अनौपचारिक पत्र का नमूना
नमूना — मित्र को बधाई पत्र
24, गांधी नगर, जयपुर
दिनांक — 15 सितंबर 2026
प्रिय मित्र अनुज,
नमस्ते।
तुम्हारा पत्र मिला। यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई कि तुमने अंतर-विद्यालय वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मुझे पहले से विश्वास था कि तुम्हारा परिश्रम रंग लाएगा।
घर पर सब कुशल हैं। अगली छुट्टियों में तुम अवश्य आना; बहुत-सी बातें करनी हैं। माता जी और पिता जी को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा मित्र
राहुल
भाषा संबंधी नियम
| नियम | कारण |
|---|---|
| औपचारिक पत्र में भावुक भाषा नहीं | वहाँ प्रयोजन मुख्य है, भाव नहीं |
| एक पत्र, एक प्रयोजन | दो असंबद्ध विषय मिलाने से निर्णय टलता है |
| छोटे अनुच्छेद | पाने वाला शीघ्र समझ पाता है |
| निवेदन विनम्र, याचना नहीं | कृपा करें पर्याप्त है |
| अनौपचारिक में कुशल-क्षेम पहले | सीधे काम की बात रूखी लगती है |
अभ्यास
-
औपचारिक और अनौपचारिक पत्र में मूल अंतर क्या है?
उत्तरऔपचारिक पत्र अधिकारियों, संस्थाओं या संपादक को लिखा जाता है और उसकी भाषा संयत तथा विषय-केंद्रित होती है। अनौपचारिक पत्र परिजनों और मित्रों को लिखा जाता है और उसकी भाषा सहज तथा आत्मीय होती है।
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विषय-पंक्ति कितनी लंबी होनी चाहिए?
उत्तरएक ही पंक्ति। विषय पत्र का शीर्षक है, सार नहीं — कारण और विवरण विषय-वस्तु में आएँगे।
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प्रधानाचार्य को लिखे पत्र में संबोधन और समापन क्या होगा?
उत्तरसंबोधन “महोदय” और समापन “भवदीय”।
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मित्र को लिखे पत्र में “भवदीय” लिखना क्यों अनुचित है?
उत्तरक्योंकि “भवदीय” औपचारिक समापन है। मित्र के पत्र में “तुम्हारा मित्र” या “स्नेही” उपयुक्त रहता है।
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अनौपचारिक पत्र में “विषय” क्यों नहीं लिखा जाता?
उत्तरक्योंकि विषय-पंक्ति कार्यालयी व्यवस्था का अंग है, जिससे पत्र सही विभाग तक पहुँचे। निजी पत्र में उसकी कोई भूमिका नहीं होती।