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Hindi vyakaran

भाषा और व्याकरण (Language & Grammar)

भाषा (Language)

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विचारों के आदान-प्रदान का साधन भाषा है। इसके तीन रूप हैं — मौखिक, लिखित और सांकेतिक।

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मनुष्य अकेला नहीं रहता। वह जो सोचता है, अनुभव करता है और चाहता है — वह सब दूसरों तक पहुँचाना चाहता है। इसी आवश्यकता से भाषा जन्मी।

भाषा कोई वस्तु नहीं, एक व्यवस्था है — ध्वनियों की ऐसी व्यवस्था जिस पर एक समाज सहमत हो चुका है। पानी शब्द में ऐसा कुछ नहीं जो स्वयं तरल हो; वह अर्थ हमने उसे दिया है। यही कारण है कि वही वस्तु अंग्रेज़ी में water और बांग्ला में जल कहलाती है।

भाषा के रूप

भाषा किस माध्यम से प्रकट हो रही है — इस आधार पर उसके तीन रूप माने जाते हैं।

1. मौखिक भाषा

बोलकर प्रकट की जाने वाली भाषा। यह भाषा का मूल और सबसे पुराना रूप है। बालक पहले बोलना सीखता है, लिखना बाद में।

उदाहरण

  • बातचीत
  • भाषण
  • वार्तालाप
  • दूरभाष पर बात
  • कहानी सुनाना

2. लिखित भाषा

लिपि-चिह्नों के द्वारा लिखकर प्रकट की जाने वाली भाषा। यह मौखिक भाषा की तुलना में बाद में विकसित हुई, पर इसी ने भाषा को स्थायित्व दिया।

उदाहरण

  • पत्र
  • पुस्तक
  • समाचार-पत्र
  • निबंध
  • संदेश

3. सांकेतिक भाषा

संकेतों, चिह्नों और मुद्राओं के द्वारा भाव प्रकट करना।

उदाहरण

  • यातायात के चिह्न
  • सिर हिलाना
  • मूक-बधिर संकेत
  • घंटी
  • ध्वज

भाषा और बोली

एक ही भाषा हर क्षेत्र में एक-सी नहीं बोली जाती। किसी सीमित क्षेत्र में बोले जाने वाले भाषा-रूप को बोली कहते हैं।

आधारबोलीभाषा
क्षेत्रसीमित, छोटाविस्तृत
प्रयोगदैनिक बोलचालशासन, शिक्षा, साहित्य
लिपिप्रायः अपनी लिपि नहींअपनी लिपि और वर्तनी
साहित्यसीमित, प्रायः मौखिकविपुल लिखित साहित्य
मानक रूपनिश्चित नहींव्याकरण से निश्चित

जब कोई बोली विस्तार पाकर साहित्य और शिक्षा में प्रयुक्त होने लगती है, तो वह विभाषा और आगे चलकर भाषा बन जाती है। खड़ी बोली का भाषा बन जाना इसी क्रम का उदाहरण है।

हिंदी की प्रमुख बोलियाँ

ब्रज, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली, मैथिली, मगही, हरियाणवी, राजस्थानी, कुमाऊँनी

भाषा के व्यावहारिक रूप

एक ही भाषा अलग-अलग भूमिकाओं में अलग नामों से पुकारी जाती है।

नामअर्थ
मातृभाषाजो भाषा बालक अपने परिवार से सहज रूप में सीखता है
राजभाषाजिस भाषा में शासन का कामकाज चलता है
राष्ट्रभाषाजो भाषा पूरे राष्ट्र में संपर्क और पहचान का माध्यम हो
संपर्क भाषाभिन्न भाषा बोलने वालों के बीच बातचीत की साझी भाषा
मानक भाषाशिक्षा, समाचार और साहित्य में प्रयुक्त निश्चित, नियमबद्ध रूप

भाषा की विशेषताएँ

  • भाषा अर्जित होती है — समाज से सीखी जाती है, जन्म से नहीं मिलती।
  • भाषा परिवर्तनशील है — समय के साथ उसके शब्द और रूप बदलते रहते हैं।
  • भाषा सामाजिक है — वह समाज की सहमति से चलती है, किसी व्यक्ति की इच्छा से नहीं।
  • भाषा के संकेत यादृच्छिक हैं — शब्द और अर्थ का संबंध स्वाभाविक नहीं, रूढ़ है।

अभ्यास

उत्तर देखने से पहले स्वयं सोचें।

  1. भाषा की परिभाषा दीजिए।

    उत्तरजिन ध्वनि-संकेतों के द्वारा मनुष्य अपने विचार दूसरों तक पहुँचाता है और दूसरों के विचार समझता है, उसे भाषा कहते हैं।

  2. भाषा के कितने रूप हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।

    उत्तरतीन — मौखिक (बातचीत, भाषण), लिखित (पत्र, पुस्तक) और सांकेतिक (यातायात के चिह्न, सिर हिलाना)।

  3. भाषा और बोली में तीन अंतर बताइए।

    उत्तरबोली का क्षेत्र सीमित होता है, भाषा का विस्तृत। बोली प्रायः दैनिक बोलचाल तक सीमित रहती है, भाषा शासन, शिक्षा और साहित्य में प्रयुक्त होती है। बोली की प्रायः अपनी लिपि और व्याकरण से निश्चित मानक रूप नहीं होता, भाषा का होता है।

  4. राजभाषा और राष्ट्रभाषा में क्या अंतर है?

    उत्तरराजभाषा वह है जिसमें शासन का कामकाज चलता है; राष्ट्रभाषा वह जो पूरे राष्ट्र में संपर्क और पहचान का माध्यम हो। संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को राजभाषा कहा गया है, राष्ट्रभाषा घोषित नहीं किया गया।

  5. “भाषा के संकेत यादृच्छिक होते हैं” — इस कथन को उदाहरण सहित समझाइए।

    उत्तरशब्द और उसके अर्थ का संबंध स्वाभाविक नहीं, समाज की रूढ़ि से बना है। “पानी” शब्द में ऐसा कुछ नहीं जो स्वयं तरल हो — इसीलिए वही वस्तु अंग्रेज़ी में water और बांग्ला में जल कहलाती है।

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Type the name in Devanagari or Roman — e.g. संज्ञा या sangya

हिंदी और रोमन — दोनों में खोजा जा सकता है।