शब्द विचार (Morphology)
क्रिया (Verb)
Download PDFजिस शब्द से किसी कार्य के होने या करने का बोध हो, वह क्रिया है। कर्म के आधार पर इसके दो मुख्य भेद हैं।
इस पृष्ठ में
वाक्य में जो शब्द बताता है कि क्या हो रहा है — वही क्रिया है। हिंदी वाक्य प्रायः क्रिया पर ही समाप्त होता है, और क्रिया के बिना वाक्य पूरा नहीं होता।
वाक्य में
राम पत्र लिखता है।
फूल खिला।
बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।
धातु
क्रिया का मूल रूप धातु कहलाता है। हिंदी में धातु के साथ ना जोड़कर क्रिया का सामान्य रूप बनता है।
| धातु | क्रिया रूप |
|---|---|
| पढ़ | पढ़ना |
| लिख | लिखना |
| खा | खाना |
| सो | सोना |
धातु से ही क्रिया के सारे रूप बनते हैं — पढ़ता, पढ़ा, पढ़ेगा, पढ़कर, पढ़वाना। इसलिए धातु पहचानना क्रिया समझने की कुंजी है।
कर्म के आधार पर भेद
यह क्रिया का सबसे महत्वपूर्ण वर्गीकरण है।
1. सकर्मक क्रिया
जिस क्रिया का कर्म होता है — अर्थात् क्रिया का फल किसी और पर पड़ता है — वह सकर्मक है।
वाक्य में
राम पुस्तक पढ़ता है। — क्या पढ़ता है? पुस्तक। अतः कर्म उपस्थित है।
माँ भोजन बनाती है।
2. अकर्मक क्रिया
जिस क्रिया का कोई कर्म नहीं होता — क्रिया का फल कर्ता पर ही पड़ता है — वह अकर्मक है।
वाक्य में
राम हँसता है। — क्या हँसता है? इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलता।
बालक सोता है।
एक ही क्रिया, दोनों रूपों में
बहुत-सी क्रियाएँ प्रसंग के अनुसार सकर्मक भी होती हैं और अकर्मक भी।
| वाक्य | भेद |
|---|---|
| वह बोलता है। | अकर्मक |
| वह सच बोलता है। | सकर्मक (कर्म — सच) |
| सिर खुजलाता है। | अकर्मक |
| वह सिर खुजलाता है। | सकर्मक |
रचना के आधार पर भेद
सामान्य क्रिया
एक ही धातु से बनी सरल क्रिया — पढ़ना, जाना, खाना।
संयुक्त क्रिया
दो या अधिक क्रियाएँ मिलकर एक क्रिया का काम करें।
उदाहरण
- पढ़ लिया
- खा चुका
- जाने लगा
- रो पड़ा
- कर डाला
प्रेरणार्थक क्रिया
जहाँ कर्ता स्वयं काम न करके किसी और से कराता है। इसके दो रूप होते हैं।
| मूल क्रिया | प्रथम प्रेरणार्थक | द्वितीय प्रेरणार्थक |
|---|---|---|
| पढ़ना | पढ़ाना | पढ़वाना |
| लिखना | लिखाना | लिखवाना |
| करना | कराना | करवाना |
| सुनना | सुनाना | सुनवाना |
अंतर समझिए
बालक पढ़ता है। — स्वयं करता है।
शिक्षक बालक को पढ़ाता है। — स्वयं प्रेरित करता है।
पिता शिक्षक से बालक को पढ़वाता है। — किसी और के द्वारा कराता है।
नामधातु क्रिया
जो क्रिया संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनी हो, धातु से नहीं।
| मूल शब्द | नामधातु क्रिया |
|---|---|
| बात | बतियाना |
| हाथ | हथियाना |
| लाज | लजाना |
| अपना | अपनाना |
| गरम | गरमाना |
पूर्वकालिक क्रिया
जब एक क्रिया दूसरी से पहले समाप्त हो जाए। धातु के साथ कर या करके जुड़ता है।
वाक्य में
वह खाना खाकर सो गया। — पहले खाना, फिर सोना।
मैं पत्र लिखकर आया।
क्रिया के अन्य रूप
समापिका और असमापिका
जो क्रिया वाक्य को पूरा कर दे, वह समापिका; जो वाक्य पूरा न करे, वह असमापिका।
वाक्य में
वह पढ़कर सो गया। — पढ़कर असमापिका, सो गया समापिका।
अभ्यास
-
“राम पुस्तक पढ़ता है।” — क्रिया सकर्मक है या अकर्मक? कारण सहित बताइए।
उत्तरसकर्मक, क्योंकि “क्या पढ़ता है?” पूछने पर उत्तर मिलता है — पुस्तक। अतः कर्म उपस्थित है।
-
“करना” के दोनों प्रेरणार्थक रूप लिखिए।
उत्तरप्रथम प्रेरणार्थक — कराना; द्वितीय प्रेरणार्थक — करवाना।
-
“वह खाना खाकर सो गया।” — इसमें पूर्वकालिक क्रिया कौन-सी है?
उत्तर“खाकर”। यह “सो गया” से पहले पूरी हो चुकी है, इसलिए पूर्वकालिक क्रिया है।
-
नामधातु क्रिया किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तरजो क्रिया संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बने, धातु से नहीं। जैसे — बात से बतियाना, अपना से अपनाना।
-
“राम ने रोटी खाई।” — यहाँ क्रिया “खाई” (स्त्रीलिंग) क्यों है, जबकि कर्ता “राम” पुल्लिंग है?
उत्तरक्योंकि कर्ता के साथ “ने” लगा है। ऐसी स्थिति में क्रिया कर्ता के नहीं, कर्म (रोटी — स्त्रीलिंग) के अनुसार चलती है।