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Hindi vyakaran

परिचय

हिंदी व्याकरण एक स्वतंत्र, निःशुल्क संदर्भ है, जिसका उद्देश्य हिंदी व्याकरण को उसी क्रम में प्रस्तुत करना है जिस क्रम में वह वास्तव में सीखा जाता है — ध्वनि से शब्द, शब्द से वाक्य, और वाक्य से रचना तक।

यह क्या है

यह हिंदी भाषा को समझने और सीखने का एक संदर्भ-ग्रंथ है। हर विषय पर उसकी गहराई अंकित है — आधार, मध्यम या उन्नत — ताकि आप जान सकें कि कोई पृष्ठ केवल अवधारणा से परिचय कराता है या उसकी विस्तृत विवेचना करता है।

सामग्री कैसे व्यवस्थित है

पूरी सामग्री सात खंडों में बँटी है। यह विभाजन मनमाना नहीं है — यही क्रम पारंपरिक हिंदी व्याकरण ग्रंथों में मिलता है, और इसी क्रम में एक अवधारणा अगली अवधारणा की नींव रखती है। उदाहरण के लिए, कारक समझने से पहले संज्ञा और विभक्ति का ज्ञान आवश्यक है, इसलिए वे पहले आते हैं।

हर पृष्ठ की रचना

प्रत्येक विषय एक ही ढाँचे में लिखा गया है, ताकि आप जानें कि क्या कहाँ मिलेगा:

  • परिभाषा — आरंभ में, एक स्पष्ट कथन में।
  • भेद — प्रत्येक भेद अपने शीर्षक के साथ, अलग से।
  • उदाहरण — नियम के तुरंत बाद, शब्द और वाक्य दोनों रूपों में।
  • ध्यान दें — अपवाद, और वे स्थान जहाँ प्रायः भ्रम होता है।
  • अभ्यास — अंत में प्रश्न, उत्तर छिपे हुए।

खोज कैसे करें

खोज देवनागरी और रोमन — दोनों लिपियों में काम करती है। यदि आपके पास हिंदी कीबोर्ड नहीं है, तो sangya, kriya या samas लिखकर भी वही विषय मिलेंगे। बिंदु (अनुस्वार) छूट जाने पर भी परिणाम मिलते हैं।

कहीं से भी खोज खोलने के लिए Ctrl + K दबाएँ, या केवल / दबाएँ।

भाषा के बारे में

सामग्री की भाषा जानबूझकर सरल रखी गई है। जहाँ पारिभाषिक शब्द अनिवार्य है, वहाँ उसका अर्थ साथ ही दिया गया है, और शब्दकोश में उसकी एक-पंक्ति परिभाषा भी उपलब्ध है। अंग्रेज़ी का प्रयोग केवल वहीं है जहाँ वह वास्तव में उपयोगी है — जैसे पारिभाषिक शब्दों के अंग्रेज़ी पर्याय।

त्रुटि मिलने पर

व्याकरण में मतभेद सामान्य हैं — विभिन्न ग्रंथ भेदों की संख्या अलग-अलग बताते हैं। जहाँ ऐसा है, वहाँ यह स्पष्ट लिखा गया है। फिर भी कोई त्रुटि दिखे तो सूचित करें; प्रत्येक पृष्ठ पर अंतिम संशोधन की तिथि अंकित है।

Type the name in Devanagari or Roman — e.g. संज्ञा या sangya

हिंदी और रोमन — दोनों में खोजा जा सकता है।