व्याकरण शब्दकोश
पारिभाषिक शब्दों के संक्षिप्त अर्थ। पूरा विवरण चाहिए तो शब्द के आगे दिए विषय पर जाएँ।
भाषा और व्याकरण
- अपभ्रंश (Apabhramsha)
- प्राकृत का अंतिम रूप (लगभग 500–1000 ई.), जिससे हिंदी सीधे विकसित हुई।
- खड़ी बोली (Khari Boli)
- दिल्ली-मेरठ क्षेत्र की वह बोली जो आधुनिक काल में मानक हिंदी बनी।
- बोली (Dialect)
- किसी सीमित क्षेत्र में बोला जाने वाला भाषा-रूप, जिसका प्रायः अपना मानक लिखित रूप नहीं होता।
- मातृभाषा (Mother tongue)
- वह भाषा जो बालक अपने परिवार से सहज रूप में सीखता है।
- राजभाषा (Official language)
- वह भाषा जिसमें शासन का कामकाज चलता है।
- लिपि (Script)
- किसी भाषा की ध्वनियों को लिखकर प्रकट करने के लिए प्रयुक्त चिह्नों की व्यवस्था।
- शिरोरेखा (Headline stroke)
- देवनागरी में शब्द के ऊपर खींची जाने वाली सीधी रेखा, जो अक्षरों को जोड़कर शब्द की सीमा स्पष्ट करती है।
वर्ण विचार
- अनुनासिक (Anunasika)
- चंद्रबिंदु (ँ), जिसका उच्चारण मुँह और नाक दोनों से होता है।
- अनुस्वार (Anusvara)
- व्यंजन के ऊपर लगने वाला बिंदु (ं), जिसका उच्चारण पूरी तरह नाक से होता है।
- अयोगवाह (Ayogavaha)
- अनुस्वार और विसर्ग, जो न पूर्णतः स्वर हैं न व्यंजन।
- अल्प विराम (Comma)
- थोड़े ठहराव पर लगने वाला चिह्न ( , ) — समान कोटि के शब्दों, संबोधन और उपवाक्यों को अलग करने में।
- उच्चारण स्थान (Place of articulation)
- मुख का वह भाग जहाँ से किसी वर्ण की ध्वनि निकलती है।
- गुण संधि (Guna sandhi)
- अ/आ के बाद इ/ई आने पर ए, उ/ऊ आने पर ओ हो जाना।
- दीर्घ स्वर (Long vowel)
- वह स्वर जिसके उच्चारण में ह्रस्व से दुगुना समय लगता है।
- पूर्ण विराम (Full stop)
- वाक्य पूरा होने पर लगने वाला चिह्न। हिंदी में इसके लिए खड़ी पाई ( । ) प्रयुक्त होती है।
- मात्रा (Matra)
- स्वर का वह संक्षिप्त रूप जो व्यंजन के साथ जुड़कर लिखा जाता है।
- यण संधि (Yan sandhi)
- इ/ई का य्, उ/ऊ का व् और ऋ का र् हो जाना, जब आगे भिन्न स्वर आए।
- योजक चिह्न (Hyphen)
- दो शब्दों को जोड़ने वाला छोटा चिह्न ( - ); निर्देशक चिह्न ( — ) से भिन्न।
- विसर्ग (Visarga)
- स्वर के बाद आने वाला दो-बिंदु चिह्न (ः), जिसका उच्चारण हल्के 'ह' जैसा होता है।
- संधि विच्छेद (Sandhi splitting)
- संधि से बने शब्द को उसके मूल शब्दों में अलग करना।
- स्पर्श व्यंजन (Stop consonant)
- वे पच्चीस व्यंजन जिनके उच्चारण में जीभ मुख के किसी भाग को स्पर्श करती है।
- हलंत (Halanta)
- व्यंजन के नीचे लगने वाली तिरछी रेखा (्), जो उसमें निहित 'अ' को हटा देती है।
- ह्रस्व स्वर (Short vowel)
- वह स्वर जिसके उच्चारण में सबसे कम समय लगता है।
शब्द विचार
- अकर्मक क्रिया (Intransitive verb)
- वह क्रिया जिसका कर्म नहीं होता; फल कर्ता पर ही पड़ता है।
- अधिकरण कारक (Locative case)
- क्रिया के आधार या स्थान का बोध कराने वाला कारक; विभक्ति 'में', 'पर'।
- अपादान कारक (Ablative case)
- जिससे कोई वस्तु अलग हो; विभक्ति 'से' (अलगाव के अर्थ में)।
- अविकारी शब्द (Uninflected word)
- वह शब्द जिसका रूप कभी नहीं बदलता; इसे अव्यय भी कहते हैं।
- उत्तरपद (Second member)
- समास में आने वाला दूसरा शब्द।
- करण कारक (Instrumental case)
- जिस साधन से काम हो; विभक्ति 'से' या 'के द्वारा'।
- जातिवाचक संज्ञा (Common noun)
- पूरी जाति के सभी प्राणियों या वस्तुओं का बोध कराने वाली संज्ञा।
- द्रव्यवाचक संज्ञा (Material noun)
- किसी पदार्थ या धातु का बोध कराने वाली संज्ञा, जिसे गिना नहीं, नापा-तौला जाता है।
- द्विगु समास (Dvigu)
- वह समास जिसमें पूर्वपद संख्यावाचक हो और पद समूह का बोध कराए।
- धातु (Verb root)
- क्रिया का मूल रूप, जिससे उसके सब रूप बनते हैं।
- नामधातु क्रिया (Denominative verb)
- संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनी क्रिया।
- निजवाचक सर्वनाम (Reflexive pronoun)
- कर्ता के स्वयं होने का बोध कराने वाला सर्वनाम।
- पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal pronoun)
- बोलने वाले, सुनने वाले या अन्य के लिए प्रयुक्त सर्वनाम।
- पूर्वकालिक क्रिया (Prior action verb)
- वह क्रिया जो दूसरी क्रिया से पहले समाप्त हो जाए; इसमें 'कर' जुड़ता है।
- पूर्वपद (First member)
- समास में आने वाला पहला शब्द।
- प्रविशेषण (Intensifier)
- वह शब्द जो विशेषण की विशेषता बताए।
- प्रेरणार्थक क्रिया (Causative verb)
- वह क्रिया जिसमें कर्ता स्वयं न करके किसी और से कराता है।
- बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi)
- वह समास जिसमें कोई पद प्रधान न हो और दोनों मिलकर किसी तीसरे का बोध कराएँ।
- भाववाचक संज्ञा (Abstract noun)
- गुण, दशा या भाव का बोध कराने वाली संज्ञा, जिसे देखा या छुआ नहीं जा सकता।
- विकारी शब्द (Inflected word)
- वह शब्द जिसका रूप लिंग, वचन या कारक के अनुसार बदलता है।
- विभक्ति (Case marker)
- संज्ञा के साथ लगने वाला वह चिह्न जो कारक प्रकट करता है; इसे परसर्ग भी कहते हैं।
- विशेष्य (Qualified noun)
- वह संज्ञा या सर्वनाम जिसकी विशेषता बताई जाती है।
- व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper noun)
- किसी एक ही विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराने वाली संज्ञा।
- संप्रदान कारक (Dative case)
- जिसके लिए काम किया जाए या जिसे कुछ दिया जाए।
- सकर्मक क्रिया (Transitive verb)
- वह क्रिया जिसका कर्म होता है और जिसका फल किसी और पर पड़ता है।
- समास विग्रह (Compound splitting)
- समस्त पद को तोड़कर उसके मूल शब्दों में लिखना।
- समूहवाचक संज्ञा (Collective noun)
- व्यक्तियों या वस्तुओं के समूह का बोध कराने वाली संज्ञा।
- सार्वनामिक विशेषण (Pronominal adjective)
- संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताने वाला सर्वनाम।
वाक्य विचार
- आश्रित उपवाक्य (Subordinate clause)
- वह उपवाक्य जो मुख्य उपवाक्य पर आश्रित हो और अकेला पूरा अर्थ न दे।
- उद्देश्य (Subject)
- वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाए।
- क्रियाविशेषण उपवाक्य (Adverb clause)
- वह आश्रित उपवाक्य जो मुख्य क्रिया की विशेषता बताए — कब, कहाँ, क्यों, किस शर्त पर।
- मिश्र वाक्य (Complex sentence)
- जिसमें एक मुख्य उपवाक्य हो और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य।
- मुख्य उपवाक्य (Principal clause)
- वह उपवाक्य जो स्वतंत्र हो और अकेला भी पूरा वाक्य बन सके।
- विधेय (Predicate)
- उद्देश्य के विषय में वाक्य में जो कुछ कहा जाए।
- विशेषण उपवाक्य (Adjective clause)
- वह आश्रित उपवाक्य जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए; प्रायः 'जो' से आरंभ होता है।
- शीर्ष पद (Head word)
- पदबंध का मुख्य शब्द, जिससे उस पदबंध का नाम तय होता है।
- संज्ञा उपवाक्य (Noun clause)
- वह आश्रित उपवाक्य जो मुख्य उपवाक्य की संज्ञा का काम करे; प्रायः 'कि' से आरंभ होता है।
- संयुक्त वाक्य (Compound sentence)
- जिसमें दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य समुच्चयबोधक अव्यय से जुड़े हों।
- सरल वाक्य (Simple sentence)
- जिसमें एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय हो, अर्थात् एक ही मुख्य क्रिया हो।
शब्द भंडार
- अनेकार्थी शब्द (Polysemous word)
- वह शब्द जिसके एक से अधिक अर्थ हों; कौन-सा अर्थ लिया जाएगा, यह वाक्य और प्रसंग तय करते हैं।
- प्रतिशब्द (Synonym)
- पर्यायवाची शब्द का दूसरा नाम — किसी शब्द के समान या लगभग समान अर्थ वाला शब्द।
- मुहावरा (Idiom)
- वह वाक्यांश जो अपना शाब्दिक अर्थ छोड़कर विशेष लाक्षणिक अर्थ देता है; यह वाक्य का अंश होता है, पूरा वाक्य नहीं।
- लाक्षणिक अर्थ (Figurative sense)
- शब्द या वाक्यांश का वह अर्थ जो उसके शाब्दिक अर्थ से हटकर लिया जाए; मुहावरे इसी पर टिके हैं।
- लोकोक्ति (Proverb)
- लोक-अनुभव से बना पूरा स्वतंत्र वाक्य जो किसी स्थिति पर ज्यों का त्यों लागू होता है; इसे कहावत भी कहते हैं।
- विपरीतार्थक शब्द (Antonym)
- विलोम शब्द का दूसरा नाम — किसी शब्द का उल्टा अर्थ प्रकट करने वाला शब्द।
- श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द (Homophone)
- वे शब्द जो सुनने में लगभग समान लगें किंतु वर्तनी और अर्थ में भिन्न हों।
काव्य और अलंकार
- अनुभाव (Consequent)
- भाव जागने के बाद शरीर पर दिखाई देने वाली बाहरी चेष्टाएँ।
- अभिधा (Denotation)
- वह शब्द शक्ति जिससे शब्द का सीधा, कोशगत अर्थ समझ में आता है; इससे मिलने वाला अर्थ वाच्यार्थ कहलाता है।
- अर्थालंकार (Sense figure)
- वह अलंकार जिसमें चमत्कार अर्थ में हो; पर्यायवाची रखने पर भी चमत्कार बना रहता है।
- उपमान (Object of comparison)
- वह वस्तु जिससे तुलना की जाए।
- उपमेय (Subject of comparison)
- वह वस्तु जिसकी तुलना की जाए।
- गण (Metrical foot)
- वर्णिक छंद में तीन वर्णों का समूह। आठ गण होते हैं, जिन्हें याद रखने का सूत्र है — यमाताराजभानसलगा।
- चौपाई (Chaupai)
- सम मात्रिक छंद जिसके चारों चरणों में 16-16 मात्राएँ होती हैं; चरण के अंत में जगण और तगण वर्जित हैं।
- दोहा (Doha)
- अर्धसम मात्रिक छंद जिसके पहले और तीसरे चरण में 13 तथा दूसरे और चौथे में 11 मात्राएँ होती हैं।
- यति (Caesura)
- छंद के चरण के भीतर ठहरने का निश्चित स्थान।
- लक्षणा (Indication)
- मुख्यार्थ बाधित होने पर उससे जुड़ा दूसरा अर्थ ग्रहण कराने वाली शब्द शक्ति।
- लक्ष्यार्थ (Indicated sense)
- लक्षणा शक्ति से मिलने वाला अर्थ — मुख्यार्थ के बाधित हो जाने पर लिया गया दूसरा अर्थ।
- वाचक शब्द (Comparative particle)
- उपमा में तुलना सूचित करने वाला शब्द।
- विभाव (Determinant)
- वे कारण जिनसे स्थायी भाव जागता है। आलंबन वह है जिसके कारण भाव जागे, उद्दीपन वह जो उसे और भड़काए।
- व्यंजना (Suggestion)
- वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ दोनों से हटकर प्रसंग से तीसरा अर्थ ध्वनित कराने वाली शब्द शक्ति।
- शब्दालंकार (Sound figure)
- वह अलंकार जिसमें चमत्कार शब्द में हो; पर्यायवाची रखने पर चमत्कार समाप्त हो जाता है।
- संचारी भाव (Transitory emotion)
- आते-जाते रहने वाले वे भाव जो स्थायी भाव को पुष्ट करते हैं; इन्हें व्यभिचारी भाव भी कहते हैं और इनकी संख्या तैंतीस मानी गई है।
- साधारण धर्म (Common attribute)
- उपमेय और उपमान में पाया जाने वाला समान गुण।
- स्थायी भाव (Permanent emotion)
- पाठक के मन में स्थायी रूप से विद्यमान वह भाव जो काव्य पढ़ने पर जाग उठता है; हर रस का अपना एक स्थायी भाव होता है।
रचना
- अनुच्छेद (Paragraph)
- एक ही विचार पर केंद्रित 80–120 शब्दों की सुसंबद्ध गद्य रचना, जिसमें शीर्षक-उपशीर्षक और खंड नहीं होते।
- औपचारिक पत्र (Formal letter)
- किसी अधिकारी, संस्था, संपादक या व्यापारिक प्रतिष्ठान को निश्चित प्रारूप और शिष्ट भाषा में लिखा जाने वाला पत्र।
- रूपरेखा (Outline)
- निबंध लिखने से पहले बनाया जाने वाला बिंदुवार ढाँचा, जिससे विचार क्रमबद्ध और विषय सीमित रहता है।
- सारांश (Summary)
- पूरी रचना, पुस्तक या कथा का संक्षिप्त रूप। संक्षेपण से भेद — इसमें विस्तार का कोई निश्चित अनुपात नहीं, क्रम बदला जा सकता है और शीर्षक अनिवार्य नहीं।