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Hindi vyakaran

व्याकरण शब्दकोश

पारिभाषिक शब्दों के संक्षिप्त अर्थ। पूरा विवरण चाहिए तो शब्द के आगे दिए विषय पर जाएँ।

भाषा और व्याकरण

अपभ्रंश (Apabhramsha)
प्राकृत का अंतिम रूप (लगभग 500–1000 ई.), जिससे हिंदी सीधे विकसित हुई। उदाहरण: शौरसेनी अपभ्रंश से खड़ी बोली निकली।
खड़ी बोली (Khari Boli)
दिल्ली-मेरठ क्षेत्र की वह बोली जो आधुनिक काल में मानक हिंदी बनी। उदाहरण: मैं जाता हूँ। (ब्रज में — मैं जात हौं)
बोली (Dialect)
किसी सीमित क्षेत्र में बोला जाने वाला भाषा-रूप, जिसका प्रायः अपना मानक लिखित रूप नहीं होता। उदाहरण: ब्रज, अवधी, भोजपुरी
मातृभाषा (Mother tongue)
वह भाषा जो बालक अपने परिवार से सहज रूप में सीखता है।
राजभाषा (Official language)
वह भाषा जिसमें शासन का कामकाज चलता है। उदाहरण: संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को राजभाषा कहा गया है।
लिपि (Script)
किसी भाषा की ध्वनियों को लिखकर प्रकट करने के लिए प्रयुक्त चिह्नों की व्यवस्था। उदाहरण: हिंदी की लिपि देवनागरी है।
शिरोरेखा (Headline stroke)
देवनागरी में शब्द के ऊपर खींची जाने वाली सीधी रेखा, जो अक्षरों को जोड़कर शब्द की सीमा स्पष्ट करती है।

वर्ण विचार

अनुनासिक (Anunasika)
चंद्रबिंदु (ँ), जिसका उच्चारण मुँह और नाक दोनों से होता है। उदाहरण: चाँद, आँख, हँसना
अनुस्वार (Anusvara)
व्यंजन के ऊपर लगने वाला बिंदु (ं), जिसका उच्चारण पूरी तरह नाक से होता है। उदाहरण: गंगा, अंग, हंस
अयोगवाह (Ayogavaha)
अनुस्वार और विसर्ग, जो न पूर्णतः स्वर हैं न व्यंजन। उदाहरण: अं, अः
अल्प विराम (Comma)
थोड़े ठहराव पर लगने वाला चिह्न ( , ) — समान कोटि के शब्दों, संबोधन और उपवाक्यों को अलग करने में। उदाहरण: राम, श्याम और मोहन आए।
उच्चारण स्थान (Place of articulation)
मुख का वह भाग जहाँ से किसी वर्ण की ध्वनि निकलती है। उदाहरण: क वर्ग कंठ्य, प वर्ग ओष्ठ्य
गुण संधि (Guna sandhi)
अ/आ के बाद इ/ई आने पर ए, उ/ऊ आने पर ओ हो जाना। उदाहरण: सूर्य + उदय = सूर्योदय
दीर्घ स्वर (Long vowel)
वह स्वर जिसके उच्चारण में ह्रस्व से दुगुना समय लगता है। उदाहरण: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
पूर्ण विराम (Full stop)
वाक्य पूरा होने पर लगने वाला चिह्न। हिंदी में इसके लिए खड़ी पाई ( । ) प्रयुक्त होती है। उदाहरण: राम पुस्तक पढ़ता है।
मात्रा (Matra)
स्वर का वह संक्षिप्त रूप जो व्यंजन के साथ जुड़कर लिखा जाता है। उदाहरण: क + ी = की
यण संधि (Yan sandhi)
इ/ई का य्, उ/ऊ का व् और ऋ का र् हो जाना, जब आगे भिन्न स्वर आए। उदाहरण: सु + आगत = स्वागत
योजक चिह्न (Hyphen)
दो शब्दों को जोड़ने वाला छोटा चिह्न ( - ); निर्देशक चिह्न ( — ) से भिन्न। उदाहरण: माता-पिता, धीरे-धीरे
विसर्ग (Visarga)
स्वर के बाद आने वाला दो-बिंदु चिह्न (ः), जिसका उच्चारण हल्के 'ह' जैसा होता है। उदाहरण: दुःख, अतः, प्रातः
संधि विच्छेद (Sandhi splitting)
संधि से बने शब्द को उसके मूल शब्दों में अलग करना। उदाहरण: हिमालय = हिम + आलय
स्पर्श व्यंजन (Stop consonant)
वे पच्चीस व्यंजन जिनके उच्चारण में जीभ मुख के किसी भाग को स्पर्श करती है। उदाहरण: क से म तक
हलंत (Halanta)
व्यंजन के नीचे लगने वाली तिरछी रेखा (्), जो उसमें निहित 'अ' को हटा देती है। उदाहरण: क् , सत्, जगत्
ह्रस्व स्वर (Short vowel)
वह स्वर जिसके उच्चारण में सबसे कम समय लगता है। उदाहरण: अ, इ, उ, ऋ

शब्द विचार

अकर्मक क्रिया (Intransitive verb)
वह क्रिया जिसका कर्म नहीं होता; फल कर्ता पर ही पड़ता है। उदाहरण: राम हँसता है।
अधिकरण कारक (Locative case)
क्रिया के आधार या स्थान का बोध कराने वाला कारक; विभक्ति 'में', 'पर'। उदाहरण: पुस्तक मेज़ पर है।
अपादान कारक (Ablative case)
जिससे कोई वस्तु अलग हो; विभक्ति 'से' (अलगाव के अर्थ में)। उदाहरण: पेड़ से पत्ता गिरा।
अविकारी शब्द (Uninflected word)
वह शब्द जिसका रूप कभी नहीं बदलता; इसे अव्यय भी कहते हैं। उदाहरण: और, किंतु, यहाँ
उत्तरपद (Second member)
समास में आने वाला दूसरा शब्द। उदाहरण: राजपुत्र में 'पुत्र'
करण कारक (Instrumental case)
जिस साधन से काम हो; विभक्ति 'से' या 'के द्वारा'। उदाहरण: वह कलम से लिखता है।
जातिवाचक संज्ञा (Common noun)
पूरी जाति के सभी प्राणियों या वस्तुओं का बोध कराने वाली संज्ञा। उदाहरण: मनुष्य, नदी, पुस्तक
द्रव्यवाचक संज्ञा (Material noun)
किसी पदार्थ या धातु का बोध कराने वाली संज्ञा, जिसे गिना नहीं, नापा-तौला जाता है। उदाहरण: सोना, दूध, गेहूँ
द्विगु समास (Dvigu)
वह समास जिसमें पूर्वपद संख्यावाचक हो और पद समूह का बोध कराए। उदाहरण: नवरत्न, त्रिलोक
धातु (Verb root)
क्रिया का मूल रूप, जिससे उसके सब रूप बनते हैं। उदाहरण: पढ़, लिख, खा
नामधातु क्रिया (Denominative verb)
संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनी क्रिया। उदाहरण: बात से बतियाना
निजवाचक सर्वनाम (Reflexive pronoun)
कर्ता के स्वयं होने का बोध कराने वाला सर्वनाम। उदाहरण: मैं आप ही जाऊँगा।
पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal pronoun)
बोलने वाले, सुनने वाले या अन्य के लिए प्रयुक्त सर्वनाम। उदाहरण: मैं, तुम, वह
पूर्वकालिक क्रिया (Prior action verb)
वह क्रिया जो दूसरी क्रिया से पहले समाप्त हो जाए; इसमें 'कर' जुड़ता है। उदाहरण: खाकर सो गया
पूर्वपद (First member)
समास में आने वाला पहला शब्द। उदाहरण: राजपुत्र में 'राज'
प्रविशेषण (Intensifier)
वह शब्द जो विशेषण की विशेषता बताए। उदाहरण: बहुत मीठा — यहाँ 'बहुत'
प्रेरणार्थक क्रिया (Causative verb)
वह क्रिया जिसमें कर्ता स्वयं न करके किसी और से कराता है। उदाहरण: पढ़ाना, पढ़वाना
बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi)
वह समास जिसमें कोई पद प्रधान न हो और दोनों मिलकर किसी तीसरे का बोध कराएँ। उदाहरण: दशानन = रावण
भाववाचक संज्ञा (Abstract noun)
गुण, दशा या भाव का बोध कराने वाली संज्ञा, जिसे देखा या छुआ नहीं जा सकता। उदाहरण: मिठास, बचपन, ईमानदारी
विकारी शब्द (Inflected word)
वह शब्द जिसका रूप लिंग, वचन या कारक के अनुसार बदलता है। उदाहरण: लड़का, लड़के, लड़की
विभक्ति (Case marker)
संज्ञा के साथ लगने वाला वह चिह्न जो कारक प्रकट करता है; इसे परसर्ग भी कहते हैं। उदाहरण: ने, को, से, में, पर
विशेष्य (Qualified noun)
वह संज्ञा या सर्वनाम जिसकी विशेषता बताई जाती है। उदाहरण: मीठा आम — यहाँ 'आम'
व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper noun)
किसी एक ही विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराने वाली संज्ञा। उदाहरण: राम, गंगा, हिमालय
संप्रदान कारक (Dative case)
जिसके लिए काम किया जाए या जिसे कुछ दिया जाए। उदाहरण: बच्चे के लिए दूध
सकर्मक क्रिया (Transitive verb)
वह क्रिया जिसका कर्म होता है और जिसका फल किसी और पर पड़ता है। उदाहरण: राम पुस्तक पढ़ता है।
समास विग्रह (Compound splitting)
समस्त पद को तोड़कर उसके मूल शब्दों में लिखना। उदाहरण: राजपुत्र = राजा का पुत्र
समूहवाचक संज्ञा (Collective noun)
व्यक्तियों या वस्तुओं के समूह का बोध कराने वाली संज्ञा। उदाहरण: सेना, सभा, भीड़
सार्वनामिक विशेषण (Pronominal adjective)
संज्ञा से पहले आकर उसकी विशेषता बताने वाला सर्वनाम। उदाहरण: वह लड़का

वाक्य विचार

आश्रित उपवाक्य (Subordinate clause)
वह उपवाक्य जो मुख्य उपवाक्य पर आश्रित हो और अकेला पूरा अर्थ न दे। उदाहरण: 'मैं जानता हूँ कि वह आएगा' में 'कि वह आएगा'
उद्देश्य (Subject)
वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाए। उदाहरण: 'राम पुस्तक पढ़ता है' में 'राम'
क्रियाविशेषण उपवाक्य (Adverb clause)
वह आश्रित उपवाक्य जो मुख्य क्रिया की विशेषता बताए — कब, कहाँ, क्यों, किस शर्त पर। उदाहरण: जब वर्षा हुई, तब किसान प्रसन्न हुए।
मिश्र वाक्य (Complex sentence)
जिसमें एक मुख्य उपवाक्य हो और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य। उदाहरण: मैं जानता हूँ कि वह ईमानदार है।
मुख्य उपवाक्य (Principal clause)
वह उपवाक्य जो स्वतंत्र हो और अकेला भी पूरा वाक्य बन सके। उदाहरण: 'मैं जानता हूँ कि वह आएगा' में 'मैं जानता हूँ'
विधेय (Predicate)
उद्देश्य के विषय में वाक्य में जो कुछ कहा जाए। उदाहरण: 'राम पुस्तक पढ़ता है' में 'पुस्तक पढ़ता है'
विशेषण उपवाक्य (Adjective clause)
वह आश्रित उपवाक्य जो किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताए; प्रायः 'जो' से आरंभ होता है। उदाहरण: यह वही पुस्तक है जिसे मैं खोज रहा था।
शीर्ष पद (Head word)
पदबंध का मुख्य शब्द, जिससे उस पदबंध का नाम तय होता है। उदाहरण: 'नीली पगड़ी वाला आदमी' में 'आदमी'
संज्ञा उपवाक्य (Noun clause)
वह आश्रित उपवाक्य जो मुख्य उपवाक्य की संज्ञा का काम करे; प्रायः 'कि' से आरंभ होता है। उदाहरण: उसने कहा कि मैं निर्दोष हूँ।
संयुक्त वाक्य (Compound sentence)
जिसमें दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य समुच्चयबोधक अव्यय से जुड़े हों। उदाहरण: वह आया और सब चले गए।
सरल वाक्य (Simple sentence)
जिसमें एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय हो, अर्थात् एक ही मुख्य क्रिया हो। उदाहरण: बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।

शब्द भंडार

अनेकार्थी शब्द (Polysemous word)
वह शब्द जिसके एक से अधिक अर्थ हों; कौन-सा अर्थ लिया जाएगा, यह वाक्य और प्रसंग तय करते हैं। उदाहरण: कर — हाथ, किरण, राजस्व
प्रतिशब्द (Synonym)
पर्यायवाची शब्द का दूसरा नाम — किसी शब्द के समान या लगभग समान अर्थ वाला शब्द। उदाहरण: जल के प्रतिशब्द — नीर, वारि, सलिल
मुहावरा (Idiom)
वह वाक्यांश जो अपना शाब्दिक अर्थ छोड़कर विशेष लाक्षणिक अर्थ देता है; यह वाक्य का अंश होता है, पूरा वाक्य नहीं। उदाहरण: नाक कटना — प्रतिष्ठा जाना
लाक्षणिक अर्थ (Figurative sense)
शब्द या वाक्यांश का वह अर्थ जो उसके शाब्दिक अर्थ से हटकर लिया जाए; मुहावरे इसी पर टिके हैं। उदाहरण: आँख का तारा — अत्यंत प्रिय
लोकोक्ति (Proverb)
लोक-अनुभव से बना पूरा स्वतंत्र वाक्य जो किसी स्थिति पर ज्यों का त्यों लागू होता है; इसे कहावत भी कहते हैं। उदाहरण: नाच न जाने आँगन टेढ़ा
विपरीतार्थक शब्द (Antonym)
विलोम शब्द का दूसरा नाम — किसी शब्द का उल्टा अर्थ प्रकट करने वाला शब्द। उदाहरण: आदि × अंत
श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द (Homophone)
वे शब्द जो सुनने में लगभग समान लगें किंतु वर्तनी और अर्थ में भिन्न हों। उदाहरण: अनल (आग) — अनिल (हवा)

काव्य और अलंकार

अनुभाव (Consequent)
भाव जागने के बाद शरीर पर दिखाई देने वाली बाहरी चेष्टाएँ। उदाहरण: कटाक्ष, मुस्कान, रोमांच, काँपना
अभिधा (Denotation)
वह शब्द शक्ति जिससे शब्द का सीधा, कोशगत अर्थ समझ में आता है; इससे मिलने वाला अर्थ वाच्यार्थ कहलाता है। उदाहरण: राम ने आम खाया। — आम अर्थात् फल
अर्थालंकार (Sense figure)
वह अलंकार जिसमें चमत्कार अर्थ में हो; पर्यायवाची रखने पर भी चमत्कार बना रहता है। उदाहरण: उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा
उपमान (Object of comparison)
वह वस्तु जिससे तुलना की जाए। उदाहरण: 'मन पीपर पात सरिस' में 'पीपर पात'
उपमेय (Subject of comparison)
वह वस्तु जिसकी तुलना की जाए। उदाहरण: 'मन पीपर पात सरिस' में 'मन'
गण (Metrical foot)
वर्णिक छंद में तीन वर्णों का समूह। आठ गण होते हैं, जिन्हें याद रखने का सूत्र है — यमाताराजभानसलगा। उदाहरण: य गण = ।ऽऽ (यमाता)
चौपाई (Chaupai)
सम मात्रिक छंद जिसके चारों चरणों में 16-16 मात्राएँ होती हैं; चरण के अंत में जगण और तगण वर्जित हैं। उदाहरण: बंदउँ गुरु पद पदुम परागा।
दोहा (Doha)
अर्धसम मात्रिक छंद जिसके पहले और तीसरे चरण में 13 तथा दूसरे और चौथे में 11 मात्राएँ होती हैं। उदाहरण: रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
यति (Caesura)
छंद के चरण के भीतर ठहरने का निश्चित स्थान। उदाहरण: रोला में यति 11 और 13 मात्राओं पर
लक्षणा (Indication)
मुख्यार्थ बाधित होने पर उससे जुड़ा दूसरा अर्थ ग्रहण कराने वाली शब्द शक्ति। उदाहरण: मेरा घर गंगा में है। — अर्थात् गंगा के तट पर
लक्ष्यार्थ (Indicated sense)
लक्षणा शक्ति से मिलने वाला अर्थ — मुख्यार्थ के बाधित हो जाने पर लिया गया दूसरा अर्थ। उदाहरण: वह गधा है। — लक्ष्यार्थ: वह मूर्ख है
वाचक शब्द (Comparative particle)
उपमा में तुलना सूचित करने वाला शब्द। उदाहरण: सा, सम, जैसा, सरिस
विभाव (Determinant)
वे कारण जिनसे स्थायी भाव जागता है। आलंबन वह है जिसके कारण भाव जागे, उद्दीपन वह जो उसे और भड़काए। उदाहरण: आलंबन — नायिका; उद्दीपन — चाँदनी
व्यंजना (Suggestion)
वाच्यार्थ और लक्ष्यार्थ दोनों से हटकर प्रसंग से तीसरा अर्थ ध्वनित कराने वाली शब्द शक्ति। उदाहरण: अतिथि से कहा गया — रात हो गई।
शब्दालंकार (Sound figure)
वह अलंकार जिसमें चमत्कार शब्द में हो; पर्यायवाची रखने पर चमत्कार समाप्त हो जाता है। उदाहरण: अनुप्रास, यमक, श्लेष
संचारी भाव (Transitory emotion)
आते-जाते रहने वाले वे भाव जो स्थायी भाव को पुष्ट करते हैं; इन्हें व्यभिचारी भाव भी कहते हैं और इनकी संख्या तैंतीस मानी गई है। उदाहरण: हर्ष, ग्लानि, चिंता, लज्जा, आवेग
साधारण धर्म (Common attribute)
उपमेय और उपमान में पाया जाने वाला समान गुण। उदाहरण: डोलना
स्थायी भाव (Permanent emotion)
पाठक के मन में स्थायी रूप से विद्यमान वह भाव जो काव्य पढ़ने पर जाग उठता है; हर रस का अपना एक स्थायी भाव होता है। उदाहरण: वीर रस का स्थायी भाव — उत्साह

रचना

अनुच्छेद (Paragraph)
एक ही विचार पर केंद्रित 80–120 शब्दों की सुसंबद्ध गद्य रचना, जिसमें शीर्षक-उपशीर्षक और खंड नहीं होते। उदाहरण: विषय वाक्य → विस्तार → समापन वाक्य
औपचारिक पत्र (Formal letter)
किसी अधिकारी, संस्था, संपादक या व्यापारिक प्रतिष्ठान को निश्चित प्रारूप और शिष्ट भाषा में लिखा जाने वाला पत्र। उदाहरण: प्रधानाचार्य को अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र
रूपरेखा (Outline)
निबंध लिखने से पहले बनाया जाने वाला बिंदुवार ढाँचा, जिससे विचार क्रमबद्ध और विषय सीमित रहता है। उदाहरण: प्रस्तावना → विषय-विस्तार → उपसंहार
सारांश (Summary)
पूरी रचना, पुस्तक या कथा का संक्षिप्त रूप। संक्षेपण से भेद — इसमें विस्तार का कोई निश्चित अनुपात नहीं, क्रम बदला जा सकता है और शीर्षक अनिवार्य नहीं। उदाहरण: उपन्यास का कथा-सार

Type the name in Devanagari or Roman — e.g. संज्ञा या sangya

हिंदी और रोमन — दोनों में खोजा जा सकता है।