भाषा और व्याकरण (Language & Grammar)
लिपि और देवनागरी (Script & Devanagari)
Download PDFध्वनियों को लिखने के चिह्नों की व्यवस्था लिपि है। हिंदी की लिपि देवनागरी है, जो बाएँ से दाएँ लिखी जाती है।
इस पृष्ठ में
भाषा ध्वनि से बनती है, और ध्वनि हवा में विलीन हो जाती है। उसे रोक लेने का साधन लिपि है।
लिपि भाषा नहीं है — वह भाषा को लिखने की व्यवस्था है। यही कारण है कि एक ही लिपि कई भाषाएँ लिख सकती है, और एक ही भाषा कई लिपियों में लिखी जा सकती है।
प्रमुख भाषाएँ और उनकी लिपियाँ
| भाषा | लिपि |
|---|---|
| हिंदी, संस्कृत, मराठी, नेपाली | देवनागरी |
| अंग्रेज़ी, फ़्रांसीसी, जर्मन | रोमन |
| उर्दू, फ़ारसी, अरबी | फ़ारसी / अरबी |
| पंजाबी | गुरुमुखी |
| बांग्ला, असमिया | बांग्ला |
| तमिल | तमिल |
| तेलुगु | तेलुगु |
देवनागरी का विकास
देवनागरी अचानक नहीं बनी। उसका मूल ब्राह्मी लिपि है — वही लिपि जिसमें सम्राट अशोक के शिलालेख उत्कीर्ण हैं।
विकास क्रम
ब्राह्मी → गुप्त लिपि → कुटिल लिपि → नागरी → देवनागरी
ब्राह्मी से ही भारत की अधिकांश आधुनिक लिपियाँ निकली हैं — बांग्ला, गुजराती, गुरुमुखी, तेलुगु और तमिल सब उसी परिवार की हैं। यही कारण है कि इन लिपियों की वर्ण-व्यवस्था का क्रम एक-सा है, भले आकृतियाँ भिन्न हों।
देवनागरी की विशेषताएँ
देवनागरी को संसार की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपियों में गिना जाता है। इसके कारण ये हैं —
- जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा जाता है। रोमन लिपि की तरह put और but का उच्चारण-भेद यहाँ नहीं होता, न ही अनुच्चरित अक्षर होते हैं।
- एक ध्वनि के लिए एक ही चिह्न है, और एक चिह्न की एक ही ध्वनि। कोई वर्ण दो तरह से नहीं बोला जाता।
- वर्णों का क्रम उच्चारण-स्थान के आधार पर वैज्ञानिक है — कंठ से आरंभ होकर ओष्ठ तक (क वर्ग कंठ से, प वर्ग ओष्ठ से)।
- लिखने की दिशा बाएँ से दाएँ है।
- शब्द के ऊपर एक सीधी शिरोरेखा खींची जाती है, जो अक्षरों को जोड़कर शब्द की सीमा स्पष्ट करती है।
- छोटे-बड़े अक्षर (capital / small) का भेद नहीं है, जिससे नियम सरल रहते हैं।
ध्वनि और लिपि का मेल
रोमन में एक ही ध्वनि कई तरह लिखी जा सकती है — see, sea, scene।
देवनागरी में सी एक ही तरह लिखा जाएगा — जैसा सुना, वैसा लिखा।
देवनागरी की संरचना
देवनागरी वर्णात्मक लिपि है, पर पूरी तरह अक्षर-आधारित नहीं। इसकी व्यवस्था इस प्रकार है —
- हर व्यंजन में अ स्वर पहले से मिला रहता है — क वस्तुतः क् + अ है।
- अन्य स्वर जोड़ने के लिए मात्रा लगाई जाती है — क, का, कि, की, कु, कू।
- स्वर हटाने के लिए हलंत (्) लगाया जाता है — क्।
- दो व्यंजन बिना स्वर के मिलें तो संयुक्त अक्षर बनता है — क् + ष = क्ष।
वर्णों की पूरी सूची, स्वर-व्यंजन के भेद और मात्राओं का विस्तार वर्णमाला के प्रकरण में देखें।
देवनागरी में सुधार के प्रयत्न
समय-समय पर लिपि को सरल बनाने के प्रयत्न हुए — मुद्रण की सुविधा के लिए संयुक्त अक्षरों को खड़ी पाई से लिखना (क्ष के स्थान पर क्ष), और मात्राओं का मानकीकरण। भारत सरकार ने 1966 में मानक देवनागरी वर्णमाला प्रकाशित की, जो आज पाठ्यपुस्तकों में प्रयुक्त होती है।
अभ्यास
-
लिपि किसे कहते हैं?
उत्तरकिसी भाषा की ध्वनियों को लिखकर प्रकट करने के लिए प्रयुक्त चिह्नों की व्यवस्था को लिपि कहते हैं।
-
लिपि और भाषा में क्या अंतर है? उदाहरण दीजिए।
उत्तरभाषा ध्वनि से बनी विचार-विनिमय की व्यवस्था है; लिपि उसे लिखने का साधन है। देवनागरी लिपि है और हिंदी भाषा — देवनागरी में हिंदी के अतिरिक्त संस्कृत, मराठी, नेपाली और कोंकणी भी लिखी जाती हैं।
-
देवनागरी का विकास क्रम बताइए।
उत्तरब्राह्मी → गुप्त लिपि → कुटिल लिपि → नागरी → देवनागरी। ब्राह्मी वही लिपि है जिसमें सम्राट अशोक के शिलालेख उत्कीर्ण हैं।
-
देवनागरी की चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तरजैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है; एक ध्वनि के लिए एक ही चिह्न है; वर्णों का क्रम उच्चारण-स्थान के आधार पर वैज्ञानिक है; यह बाएँ से दाएँ लिखी जाती है और शब्द के ऊपर शिरोरेखा होती है। छोटे-बड़े अक्षरों का भेद भी नहीं होता।
-
देवनागरी को शुद्ध वर्णमाला क्यों नहीं कहा जाता?
उत्तरक्योंकि इसकी मूल इकाई अकेला व्यंजन नहीं है — हर व्यंजन में “अ” स्वर पहले से मिला रहता है (क = क् + अ)। स्वर बदलने के लिए मात्रा और हटाने के लिए हलंत लगाना पड़ता है, इसलिए इसे अक्षरात्मक-वर्णात्मक (abugida) कहा जाता है।