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Hindi vyakaran

रचना (Composition)

संक्षेपण (Precis Writing)

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मूल अनुच्छेद को उसके एक-तिहाई में, भाव सुरक्षित रखते हुए अपनी भाषा में समेटने की कला।

मध्यम विस्तृत विवेचन अंतिम बदलाव
इस पृष्ठ में

संक्षेपण काटने की क्रिया नहीं, छाँटने की क्रिया है। लंबे गद्यांश में से जो आवश्यक है वह बचे और जो विस्तार है वह हटे — पर पढ़ने वाले तक मूल बात उतनी ही पूरी पहुँचे।

इसे सार लेखन भी कहा जाता है।

संक्षेपण के नियम

नियमस्पष्टीकरण
विस्तारमूल का लगभग एक-तिहाई
भाषाअपनी, मूल की पंक्तियाँ ज्यों की त्यों नहीं
पुरुषसदा अन्य पुरुष में
कालप्रायः भूतकाल में
रूपएक ही अनुच्छेद, बिना शीर्षक-उपशीर्षक
शीर्षकअंत में एक उपयुक्त शीर्षक अवश्य
क्रममूल गद्यांश का विचार-क्रम वही रहे

क्या हटेगा, क्या रहेगा

हटाइएरखिए
उदाहरण और दृष्टांतमूल विचार
दोहराव और पुनरुक्तिकारण और निष्कर्ष
अलंकारिक भाषा, उपमाएँतथ्य और आँकड़े
उद्धरण और सूक्तियाँतर्क का क्रम
संबोधन और विस्मयादिबोधकविषय का निर्णायक भाग

विधि

  1. गद्यांश को दो बार पढ़िए — पहली बार भाव के लिए, दूसरी बार बिंदुओं के लिए।
  2. मूल शब्द-संख्या गिनिए और एक-तिहाई का लक्ष्य तय कर लीजिए।
  3. मुख्य बिंदु अलग लिख लीजिए, गौण विवरण छोड़ दीजिए।
  4. बिंदुओं को अपनी भाषा में जोड़कर एक अनुच्छेद बनाइए।
  5. लंबे वाक्यांशों के स्थान पर एक शब्द रखिए — यहीं वाक्यांश के लिए एक शब्द काम आता है।
  6. अंत में शीर्षक दीजिए और शब्द-संख्या लिख दीजिए।

उदाहरण

मूल गद्यांश (लगभग 105 शब्द)

परिश्रम मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है। संसार में जितने भी महान व्यक्ति हुए हैं, उनमें से अधिकांश असाधारण प्रतिभा लेकर नहीं जन्मे थे। वे साधारण लोग थे, किंतु उन्होंने अपने लक्ष्य के लिए निरंतर परिश्रम किया। एडिसन ने हज़ार बार असफल होने पर भी प्रयोग नहीं छोड़े। कबीर, जिन्हें औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी, अपने अनुभव और साधना के बल पर अमर हो गए। इसके विपरीत अनेक प्रतिभाशाली लोग केवल आलस्य के कारण कुछ नहीं कर पाते। भाग्य भी उसी का साथ देता है जो प्रयत्न करता है। इसलिए कहा गया है कि परिश्रम ही सफलता की एकमात्र कुंजी है।

संक्षेप (लगभग 35 शब्द)

लेखक के अनुसार सफलता का आधार जन्मजात प्रतिभा नहीं, निरंतर परिश्रम है। अधिकांश महान व्यक्ति साधारण थे और परिश्रम से ही ऊँचे उठे, जबकि प्रतिभाशाली लोग भी आलस्य के कारण असफल रह जाते हैं।

शीर्षक — परिश्रम ही सफलता की कुंजी

ध्यान दीजिए कि संक्षेप में एडिसन और कबीर के उदाहरण हट गए, पर जिस विचार को वे सिद्ध कर रहे थे वह ज्यों का त्यों बचा रहा। यही संक्षेपण की कसौटी है।

शीर्षक कैसा हो

गुणउदाहरण
संक्षिप्त — दो से पाँच शब्दपरिश्रम ही सफलता की कुंजी
मूल भाव का सूचकविषय का केंद्र पकड़े
वाक्य नहीं, पदबंधपरिश्रम करना चाहिए उपयुक्त नहीं

संक्षेपण और सारांश में अंतर

आधारसंक्षेपणसारांश
सामग्रीगद्यांश या अनुच्छेदपूरी रचना, पुस्तक या कथा
विस्तारनिश्चित — एक-तिहाईकोई निश्चित अनुपात नहीं
क्रममूल का क्रम अनिवार्यक्रम बदला जा सकता है
शीर्षकअनिवार्यआवश्यक नहीं

अभ्यास

उत्तर देखने से पहले स्वयं सोचें।

  1. संक्षेपण का विस्तार कितना होना चाहिए?

    उत्तरमूल गद्यांश का लगभग एक-तिहाई।

  2. संक्षेपण सदा अन्य पुरुष में क्यों लिखा जाता है?

    उत्तरक्योंकि संक्षेपण लेखक की बात को दोहराता नहीं, उसे रिपोर्ट करता है। इसीलिए “मैं मानता हूँ कि” संक्षेप में “लेखक का मत है कि” बन जाता है।

  3. संक्षेपण करते समय गद्यांश में से क्या-क्या हटाया जाता है?

    उत्तरउदाहरण और दृष्टांत, दोहराव, अलंकारिक भाषा और उपमाएँ, उद्धरण तथा संबोधन। मूल विचार, कारण, निष्कर्ष और तथ्य बने रहते हैं।

  4. संक्षेपण और सारांश में क्या अंतर है?

    उत्तरसंक्षेपण किसी गद्यांश का होता है, उसका अनुपात निश्चित (एक-तिहाई) होता है, मूल क्रम अनिवार्य है और शीर्षक देना पड़ता है। सारांश पूरी रचना या पुस्तक का होता है, उसका कोई निश्चित अनुपात नहीं होता और क्रम बदला जा सकता है।

  5. क्या संक्षेपण में अपनी राय जोड़ी जा सकती है?

    उत्तरनहीं। मूल लेखक से असहमति होने पर भी संक्षेप उसी का मत प्रस्तुत करेगा। टिप्पणी और संक्षेपण दो अलग रचनाएँ हैं।

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