भाषा और व्याकरण (Language & Grammar)
व्याकरण (Grammar)
Download PDFभाषा को शुद्ध रूप में बोलने और लिखने के नियमों का शास्त्र व्याकरण है। इसके तीन अंग हैं — वर्ण, शब्द और वाक्य विचार।
इस पृष्ठ में
भाषा व्याकरण से पहले आती है। लोग बोलते रहे, और उस बोलने में जो नियम स्वयं बन गए, उन्हें बाद में किसी ने देखकर लिख लिया — वही व्याकरण है।
इसलिए व्याकरण भाषा पर नियम थोपता नहीं, भाषा में पहले से चल रहे नियमों को खोजकर व्यवस्थित करता है। लड़का जाता है और लड़की जाती है — यह भेद व्याकरण के कारण नहीं है; व्याकरण केवल बताता है कि यह भेद लिंग के कारण होता है।
व्याकरण की आवश्यकता क्यों
बिना व्याकरण जाने भी लोग भाषा बोल लेते हैं। फिर उसे पढ़ने की आवश्यकता क्या है?
- भाषा का शुद्ध और मानक रूप निश्चित होता है, जिससे लिखित भाषा हर क्षेत्र में एक-सी रहे।
- अर्थ का भ्रम दूर होता है — रोको, मत जाने दो और रोको मत, जाने दो का अंतर व्याकरण ही सँभालता है।
- भाषा के नियम जान लेने पर नए शब्द और वाक्य स्वयं बनाए जा सकते हैं, रटने की आवश्यकता नहीं रहती।
- अनुवाद, संपादन और साहित्य के अध्ययन का कोई आधार ही व्याकरण के बिना नहीं बनता।
एक ही वाक्य, दो अर्थ
रोको, मत जाने दो। — जाने से रोक दो।
रोको मत, जाने दो। — जाने दो, रोको नहीं।
अंतर केवल अल्पविराम के स्थान का है, पर अर्थ उलट गया।
व्याकरण के अंग
हिंदी व्याकरण को परंपरा से तीन भागों में बाँटा जाता है। यह विभाजन आकस्मिक नहीं — यह भाषा की अपनी संरचना का क्रम है: ध्वनि से शब्द बनता है, शब्द से वाक्य।
| अंग | अध्ययन का विषय | प्रमुख प्रकरण |
|---|---|---|
| वर्ण विचार | भाषा की सबसे छोटी इकाई — ध्वनि और वर्ण | वर्णमाला, स्वर, व्यंजन, संधि, उच्चारण, विराम चिह्न |
| शब्द विचार | शब्दों के भेद, रूप और रचना | संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण, कारक, काल, समास, उपसर्ग, प्रत्यय |
| वाक्य विचार | शब्दों से वाक्य बनने की व्यवस्था | वाक्य के भेद, पदबंध, उपवाक्य, वाक्य परिवर्तन, वाक्य शुद्धि |
शब्द और पद
व्याकरण में यह भेद बहुत काम आता है, और आरंभ में ही स्पष्ट कर लेना चाहिए।
जब कोई शब्द अकेला, शब्दकोश में पड़ा हो, तब वह केवल शब्द है। जब वही शब्द किसी वाक्य में आकर व्याकरणिक भूमिका निभाने लगे, तब वह पद कहलाता है।
तुलना कीजिए
लड़का — यह अभी शब्द है।
लड़का पुस्तक पढ़ता है। — यहाँ लड़का पद है, क्योंकि अब वह कर्ता की भूमिका में है, पुल्लिंग है, एकवचन है।
भाषा बदलती है, व्याकरण भी
व्याकरण कोई जड़ नियम-संग्रह नहीं है। भाषा में जो प्रयोग लंबे समय तक चलते हैं, वे अंततः शुद्ध मान लिए जाते हैं। जो कल अशुद्ध था, वह सौ वर्ष बाद मानक हो सकता है।
फिर भी किसी एक समय पर एक मानक रूप का होना आवश्यक है — वरना शिक्षा, प्रशासन और प्रकाशन का कोई साझा आधार नहीं रहेगा। व्याकरण यही आधार देता है।
अभ्यास
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व्याकरण की परिभाषा दीजिए।
उत्तरवह शास्त्र जिसके द्वारा किसी भाषा को शुद्ध बोलना, शुद्ध पढ़ना और शुद्ध लिखना आता है, उसे व्याकरण कहते हैं।
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“व्याकरण” शब्द की व्युत्पत्ति बताइए।
उत्तरवि + आ + करण, जिसका अर्थ है भली-भाँति समझाना या विश्लेषण करना — अर्थात् भाषा को तोड़कर यह दिखाना कि वह किस तरह काम करती है।
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व्याकरण के तीन अंग कौन-से हैं और प्रत्येक में क्या पढ़ा जाता है?
उत्तरवर्ण विचार — ध्वनि और वर्ण (वर्णमाला, संधि, उच्चारण)। शब्द विचार — शब्दों के भेद और रूप (संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, कारक, समास)। वाक्य विचार — वाक्य की रचना (वाक्य के भेद, पदबंध, उपवाक्य, वाक्य शुद्धि)।
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शब्द और पद में क्या अंतर है? उदाहरण दीजिए।
उत्तरअकेला शब्द, जो वाक्य में प्रयुक्त न हुआ हो, केवल शब्द है; वाक्य में आकर व्याकरणिक भूमिका निभाने पर वही पद बन जाता है। “लड़का” अकेले में शब्द है; “लड़का पुस्तक पढ़ता है” में वह पद है — कर्ता, पुल्लिंग, एकवचन।
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“व्याकरण भाषा पर नियम थोपता नहीं” — इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तरभाषा व्याकरण से पहले बनती है। लोग बोलते हैं और उस प्रयोग में नियम स्वयं बन जाते हैं; व्याकरण उन्हीं पहले से चल रहे नियमों को खोजकर व्यवस्थित करता है। “लड़का जाता है / लड़की जाती है” का भेद व्याकरण ने बनाया नहीं, केवल यह बताया कि वह लिंग के कारण है।